Nukkad Natak Script In Hindi On Cleanliness Pdf 20 【2024】
नुक्कड़ नाटक सिर्फ़ मनोरंजन नहीं; यह लोगों के दिलों तक संदेश पहुँचाने का ज़ोरदार माध्यम है। खासकर सफाई और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर—जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ता है—नुक्कड़ नाटक तत्काल ध्यान खींचते और व्यवहार बदलने की ताकत रखते हैं।
Cleanliness in India is not just about sweeping floors. It involves:
A good Nukkad Natak touches upon these points using satire, slogans, and local dialect.
जागरूक बच्चा:
रुको गंदगी दादा! अब नहीं चलेगा तेरा अत्याचार।
(लापरवाह नागरिक को) भैया, आपने छिलका यहाँ क्यों फेंका? गली के कोने पर तो डस्टबिन रखा है।
लापरवाह नागरिक:
छोड़ो ना बच्चा, सब करते हैं। मुझसे अकेले क्या होगा?
स्वच्छता दीदी:
नहीं, गलत सोच है आपकी।
(जोर से) एक व्यक्ति, एक कदम, एक बदलाव - हम सब मिलकर लाएँगे सुधार।
गंदगी सिर्फ बीमारी नहीं, ये गरीबी की सहेली है।
स्वच्छता से ही आती है हेल्थ, वेल्थ और खेली! Nukkad Natak Script In Hindi On Cleanliness Pdf 20
गंदगी दादा: (हंसकर)
हा हा, तुम लोगों को स्वच्छता पसंद है? देखूँ कैसे करते हो।
(लापरवाह नागरिक से) तू ही बता, पिछले हफ्ते तूने गटर के पास कूड़ा तो फेंका था?
लापरवाह नागरिक: (शर्म से) अरे... वो... सुबह जल्दी थी।
बच्चा:
भैया, जब आपको डेंगू हुआ था, तब डॉक्टर ने क्या कहा था?
"आपके घर के आसपास पानी जमा था, मच्छर पैदा हुए।"
अब भी वही कर रहे हैं!
लापरवाह नागरिक: (सिर पीटते हुए)
हाय, सच कहा तूने। मेरा बेटा भी बीमार हुआ था। मुझे माफ करो।
विषय: स्वच्छता अभियान (Cleanliness) शीर्षक: गंदगी से आज़ादी अवधि: 12-15 मिनट (बढ़ाकर 20 मिनट किया जा सकता है) पात्र (5-7 लोग): Cleanliness in India is not just about sweeping floors
(सभी कलाकार मंच के पीछे। सूत्रधार आगे आता है, ढोलक या ताली बजाते हुए)
सूत्रधार:
आओ भाइयों, सुनो कहानी,
गंदगी और बीमारी की जुबानी।
खुले में कूड़ा, नाला बहता,
हर तरफ मच्छर है रेहता।
नुक्कड़ नाटक है आपके द्वार,
बोलो सब मिलकर... जय हो स्वच्छता अपार!
(तेज संगीत - ढोलक। गंदगी दादा जोर से हंसते हुए आता है, हाथ में कूड़े का थैला)
गंदगी दादा:
हा हा हा... मैं हूँ गंदगी दादा, सबका मन भाया।
तुमने थूका, तुमने फेंका, मैं यहीं पनपा-बढ़ा।
खाओ पान, थूको यहाँ, डालो छिलका वहाँ।
हर घर में बीमारी पहुँचाऊँ, यही मेरा काम है भाई!
(वह स्टेज पर छींटे मारता है। लापरवाह नागरिक आता है, मोबाइल देखता है, पान का पैकेट फेंकता है) A good Nukkad Natak touches upon these points
लापरवाह नागरिक:
अरे यार, डस्टबिन बहुत दूर है, घर से निकलते ही फेंक दूँगा।
इतनी कौन सी बीमारी फैल जाएगी? (बेपरवाही से आगे बढ़ता है)
गंदगी दादा: (उसके कंधे पर हाथ रखकर)
शाबाश बेटा! ऐसे ही करो। फैलाओ गंदगी, मैं फैलाऊंगा बीमारी - डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड।
(गंदगी दादा नाचता है। तभी स्वच्छता दीदी और बच्चा आते हैं, झाड़ू लिए)
(बस स्टैंड पर)
रमेश (थूकता है): खूँ खूँ…
पुलिसकर्मी (सीटी बजाते हुए): थूकने पर 500 रुपये जुर्माना!
रमेश: अरे भाई, आदत है।
सुमन: आदत बदलनी होगी, कोरोना ने सबक दिया – थूकना मत, मास्क लगाओ, साफ रहो।