Palitana - 5 Chaityavandan In Hindi Full

यह पालिताना का सबसे प्रमुख और पवित्र मंदिर है।

प्रार्थना: प्रत्येक चैत्यवंदन से पहले ‘नमोकार मंत्र’ का 108 बार जाप।

प्रत्येक चैत्यवंदन में ये क्रियाएँ होती हैं:

विशेष: पाँचों चैत्यवंदन के बीच में कम से कम एक प्रहर (3 घंटे) का अंतराल रखा जाता है। इस बीच साधक मौन रहकर स्वाध्याय करता है।

मूल पाठ:

आउरियाए चाउरियाए, देउलियाए चिट्ठिआणं। छप्पि आसण पडिमाणं, णमो णमो वंदामि णिच्चं। palitana 5 chaityavandan in hindi full

हिंदी अर्थ:

जो मंदिर में विराजमान हैं, जो आसन पर विराजमान हैं, जो खड़े हैं, चारों दिशाओं में स्थित हैं, अथवा छह प्रकार की प्रतिमाओं में स्थित हैं – उन सभी जिनेन्द्रों को मैं नित्य (प्रतिदिन) नमस्कार करता हूँ, वंदना करता हूँ।

मूल पाठ:

णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं।

हिंदी अर्थ:

मैं अरिहंत (तीर्थंकर) को नमस्कार करता हूँ, मैं सिद्ध (मुक्त आत्माओं) को नमस्कार करता हूँ, मैं आचार्य को नमस्कार करता हूँ, मैं उपाध्याय को नमस्कार करता हूँ, मैं संसार के समस्त साधुओं को नमस्कार करता हूँ।

विशेषता: यह सभी चैत्यवंदन का आधार है। पालीताना में पहले चैत्यवंदन के रूप में यह 'पंच परमेष्ठि' को समर्पित है।

श्री शत्रुंजय तीर्थ (पालीताना) जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ के दर्शन मात्र से ही जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पालीताना की यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए 'पाँच चैत्यवंदन' (5 Chaityavandan) का विशेष महत्व है। यह प्रतिदिन पढ़े जाने वाले चैत्यवंदन से थोड़ा भिन्न होता है और विशेष रूप से शत्रुंजय जैसे प्राचीन तीर्थों के लिए निर्धारित है।

इस लेख में हम पालीताना के पाँच चैत्यवंदन को पूर्ण पाठ (संस्कृत/प्राकृत) के साथ, सरल हिंदी अर्थ और विधि सहित प्रस्तुत कर रहे हैं।

मूल पाठ:

णमो णमो णमो जिणाणं, जिणवर चरण कमल मणिरंजित माणं। उप्पन्न चउव्वीसं, अज्जभवि चउव्वीसं। आगामि चउव्वीसं, तच्च चउ दस साहुणं... (लघु रूप में) - णमो णमो अरिहंताणं भगवंताणं जिणाणं केवलिाणं सव्वदुक्ख प्रहाणयाणं।

हिंदी अर्थ:

मैं जिनेन्द्र भगवान को बार-बार नमस्कार करता हूँ, जिनके चरणकमलों में रत्न जटित (चरण चिह्न) मन को मोह लेते हैं। भूतकाल में हुए 24 तीर्थंकर, वर्तमान में विद्यमान 24 तीर्थंकर, भविष्य में होने वाले 24 तीर्थंकर तथा चौदह कुलकर – सभी को नमस्कार है।

कुछ ग्रंथों और मार्गदर्शक पुस्तिकाओं में पांचवीं वंदना के रूप में विमान के अलावा किसी अन्य विशिष्ट स्थान या प्राचीन वृक्ष (अश्वत्थ वृक्ष) के नीचे स्थित प्रतिमा का उल्लेख मिलता है।

(नोट: कुछ मार्गदर्शक पुस्तिकाओं में मंदिरों का क्रम या नाम थोड़ा भिन्न हो सकता है, लेकिन उपरोक्त पांच प्रमुख स्थानों का अधिकतर यात्री सेवन करते हैं।) मूल पाठ:


पालीताना में केवल मंत्रों का उच्चारण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक विशेष क्रम का पालन करना चाहिए: